इश्क़….आज़ाद पँक्षी

मज़हब..!! कब भला ये पहचानता है!! इश्क़..!! जाति, धर्म से परे जीना जानता है!! आजाद..!! पँछी की भाँति…हर बन्धन से मुक्ति चाहता है!! मोहब्बत..!! खुद का मज़हब, खुद का ही ईमान मानता है!! —–– अगली रचना:- (( Next )) ————– रचनाकार:- सुनिधिचौहान अन्य लेखकों की रचनायें पढ़ने के लिए.. (( क्लिक करें )) अन्य रचनाओं…

अध्याय~ 9

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#प्रेममयी_प्रेमग्रन्थ ★••••••••••••★ 📖#प्रेममयी_प्रेमग्रन्थ✍ ★•••••••★ #वोकहतेहै आपको पता है, अगर आप दूर हुए, तो मैं टूट जाऊँगा💔 #कहा_मैंने, टूट कर उम्रभर, आपको ही चाहूँगी एक पल को भी नजरों से दूर नही जाऊँगी❤ ★•••••••★ ★••••••••••••★ ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~~~~~~~~~~~~~~ अगला अध्याय:- (शीघ्र ही) अन्य अध्याय रचनाकार [{कवयित्री/कवि }]:- सुनिधि चौहान ———- अन्य लेखकों की रचनायें…

प्रीत का ये बन्धन by @SunidhiChauhaan

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Pic credit:- Google #सागर में जितनी,, गहराई है, प्रेम में उनके,, उतनी सच्चाई है… उनके संग,, जो सम्बंध जुड़ा हर एक सदा,, मुस्काई है…. प्रेम दिया,, अम्बर भर का, हर दुःख से, अब आज़ाद किया,, उनके अपनेपन ने मानो,, जीवन मे,, कलियाँ बिखराई है…. शब्दों की उनको चाह नही, आँखों को पढ़…